मैल्कम फ़ोर्ब्स ने कहा था “शिक्षा का मकसद है एक खाली दिमाग को खुले दिमाग में परिवर्तित करना” । विमर्श पत्रिका हमारे महाविद्यालय की कल्पना को साकार करता है, हमारे प्राध्यापक और शिक्षार्थी अपने उत्साह से कौशल और रचनात्मकता के साथ इस पत्रिका को और भी सशक्त्त बनाने का प्रयास करते हैं । विमर्श पत्रिका हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्यूँ की इस पत्रिका से लेखक अच्छे लेख और रचनाओं के माध्यम से अपने मनोभावों को व्यक्त करते हैं ।

मैं अपने सभी सहयोगियों और विद्याथियों को बधाई देता हूं तथा संकायों, जिन्होंने विभिन्न माध्यमों का उपयोग करके अपने और शिक्षाथियों के विचारों को प्रस्तुत किया , यक़ीनन इन के विचारों को पढ़ने और आत्मसाध करने के बाद हमें निश्चितरूप से कुछ नए विचार मिलते हैं जो अंतर्मन में आंदोलित होते हैं और हम सब पुनः एक नए सिरे से उन विचारों का पुर्नमूल्यांकन करने लगते हैं |

मैं हर उस शिक्षार्थी की सराहना करता हूं जिसने अपने लेख इस पत्रिका में साझा की और अपने सह-पाठयक्रम में भी भागीदारी के साथ ही अतिरिक्त गतिविधियाँ में प्रतिबद्धता के साथ लगे रहे । यक़ीनन पढ़ना और पढ़ाना एक रोचक और जिज्ञासु प्रबृत्त का द्योतक होता है |

लेखन में आप सब यूँ ही प्रतिबद्धता के साथ प्रयास करते रहे निश्चित रूप से आप का भविष्य उज्जवल होगा |
सस्नेह सहित आपका
- डॉ राधेश्याम सिंह (संपादक)